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diabetes ke lakshan or ayurvedic upay | डायबिटीज के लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

diabetes ke lakshan or ayurvedic upay

डायबिटीज दो प्रकार की होती हैं। टाइप-1 में अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में जब इंसुलिन का निर्माण नहींकर पाता है, तो ऐसे रोगियों को इंसुलिन देकर शर्करा को चयापचय के योग्य बनाया जाता है। टाइप-2 में अग्नाशय से पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन निकलता तो है, लेकिन उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता। ऐसे रोगियों को खानेवाली दवाएं दी जाती हैं। प्री-डायबीटीज में रक्त में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। पैरों और सांस से आ रही बदबू से ऐसे लोगों की पहचान की जाती है। 



दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रस का सेवन करें। 

दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ करें। 

दिन में एक बार 2 चम्मच लौकी के रस को एक चम्मच आंवले के रस के साथ मिलकर लें। 

ग्रीन टी भी मधुमेह मे बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसके सेवन से शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमालकर पाता है।

सहजन के पत्तों में दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित सेवन से भी लाभ प्राप्त होता है।

एक टमाटर, एक खीरा और एककरेले को मिलाकर जूस निकाल लीजिए। इस जूस को हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट लीजिए। इससे डायबिटीज में बहुत फायदा होता है।

गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों से रस निकालकर प्रतिदिन सेवन करने से भी मुधमेह नियंत्रण में रहता है।

शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को तोरई, लौकी, परवल, पालक, पपीते आदि का प्रयोग भी ज्यादाकरना चाहिए। 

सदाबहार के फूल की कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से रोग से राहत मिलती है। सदाबहार के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाएं और दो घूंट पानी पी लें।

आधा कप गरम पानी में सदाबहार के तीन-चार ताजे गुलाबी फूल पांच मिनट तक भिगोकर रखें। इसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह खाली पेट पियें। 

दो ग्राम दालचीनी चूर्ण और एक लौंग उबले पानी में डालकर ढककर रख दें। 15 मिनट बाद इस पानी को पिएं। रोजाना दो बार सुबह-शाम ऐसा करने से काफी तेजी से डायबिटीज पर नियंत्रण किया जा सकता है।

50 ग्राम गिलोय का ताजा रस प्रतिदिन दिन दो बार लें। यह डायबिटीज में फायदेमंद होता है।

6 बेल पत्र, 6 नीम के पत्ते, 6 तुलसी के पत्ते, 6 बैगनबेलिया के हरे पत्ते, 3 साबुत काली मिर्च पीसकर खाली पेट पानी के साथ लें और सेवन के बाद कम से कम आधा घंटा और कुछ न खाएं। इसके नियमित सेवन से भी शुगर सामान्य हो जाती है। 

कच्ची फराशबीन की फलियों को खाने से शुगर काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है। फराशबीन को कम तेल में आधा कच्चा रह जाए तब तक पकाएं। इन्हें चबाने से डायबिटीज नियंत्रण में रहती है।

फराशबीन और पत्ता गोभी के रस को मिलाकर सेवन करें।

बेल और सीताफल के पत्तों के चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर एक चम्मच पानी के साथ डायबिटीज के रोगियों के दें।
कटहल की पत्तियों का रस पिएं। 

नीम के गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर रस चूसने से डायबिटीज में आराम मिलता है। 

छुईमुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा पीने से डायबिटीज में बहुत राहत मिलती है। 

गिलोय चूर्ण की 15 ग्राम मात्रा का घी में मिलाकर सेवन करें। ये नुस्खा डायबिटीज के नियंत्रण में बहुत कारगर है।

भिंडी का पाउडर (5 ग्राम), इलायची (5 ग्राम), दालचीनी की छाल का पाउडर (3 ग्राम) और काली मिर्च ( 5 दाने) कूटकर मिश्रण तैयारकर लें। इस मिश्रण के तीन हिस्सेकरके रोजाना दिन में तीन बार गुनगुने पानी में मिलाकर सेवन करें।

शुगर स्तर को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते को प्रतिदिन खाली पेट लें या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें। 

मधुमेह के रोगियों को काले नमक के साथ जामुन खाना चाहिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
लगभग एक महीने तक रोज के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे रक्त शुगर स्तर को कम करने के साथ वजन को भी नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। 

करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कमकरता है। 

उबलेकरेले के पानी से मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त किया जा सकता है। 

मेथीदानों का चूर्ण नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून पानी के साथ लेना चाहिए। 

काँच या चीनी मिट्टी के बर्तन में 5-6 भिंडियाँ काटकर रात को गला दीजिए, सुबह इस पानी को छानकर पी लीजिए। 

मधुमेह के मरीजों को नियमित रूप से दो चम्मच नीम और चार चम्मच केले के पत्ते के रस को मिलाकर पीना चाहिए।

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