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mulethi ke fayde | मुलेठी के फ़ायदे

mulethi ke fayde

मुलहठी , जिसे मुलेठी भी कहते हैं , एक उपयोगी एवं सुपरिचित जड़ी है । मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्त करती है , इससे पेट के घाव जल्दी भर जाते हैं । पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए ।

 

मुलेठी पेट के अल्सर के लिए फायदेमंद है । इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह फायदा करती है ।

 

जब मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच , हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है । साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है ।

 

खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण लेने से फायदा होता है । खूनी उल्टी होने पर मधु के साथ भी इसे लिया जा सकता है ।

 

हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है ।

 

मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है ।

 

ये एक प्रकार की एंटीबायोटिक भी है इसमें बैक्टिरिया से लड़ने की क्षमता पाई जाती है । यह शरीर के अन्दरूनी चोटो में भी लाभदायक होती है ।

 

मुलेठी के चूर्ण से आँखों की शक्ति भी बढ़ती है सुबह तीन या चार ग्राम खाना चाहिये ।

 

यदि भूख न लगती हो तो एक छोटा टुकड़ा मुलेठी कुछ देर चूसे , दिन में 3-4 बार इस प्रक्रिया को दोहरा ले , भूख खुल जाएगी ।

 

कोई भी समस्या न हो तो भी कभी - कभी मुलेठी का सेवनकर लेना चाहिए । आँतों के अल्सर , कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचन क्रिया भी एकदम ठीक रहती है ।

 

यह ठंडी प्रति की होती है और पित्त का शमन करती है ।

 

मुलेठी को काली - मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है । सूखी खांसी आने पर मुलेठी खाने से फायदा होता है । इससे खांसी तथा गले की सूजन ठीक होती है ।

 

अगर मुंह सूख रहा हो तो मुलेठी बहुत फायदा करती है । इसमें पानी की मात्रा 50 प्रतिशत तक होती है । मुंह सूखने पर बार - बार इसे चूसें । । इससे प्यास शांत होगी ।

 

गले में खराश के लिए भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है । मुलेठी अच्छे स्वर के लिए भी प्रयोग की जाती है ।

 

मुलेठी महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है । मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवनकरने से वे अपनी सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं ।

 

लगभग एक महीने तक , आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण सुबह शाम शहद के साथ चाटने से मासिक संबंधी सभी रोग दूर होते है ।

 

फोड़े होने पर मुलेठी का लेप लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है । रोज 6 ग्राम मुलेठी चूर्ण , 30 मि.ली. दूध के साथ पीने से शरीर में ताकत आती है ।

 

लगभग 4 ग्राम मुलेठी का चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से ह्रदय रोगों में लाभ होता है । इसके आधा ग्राम रोजाना सेवन से खून में वृद्धि होती है ।


जलने पर मुलेठी और चंदन के लेप से शीतलता मिलती है।

 

इसके चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।

 

मुलेठी का टुक ड़ा मुंह में रखने से कान का दर्द और सूजन ठीक होता है।

 

उलटी होने पर मुलेठी का टुकडा मुंह में रखने पर लाभ होता है।

 

मुलहठी चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकी आना बंद होता है। यह प्रयोग वात और पित्त का शमन भी करता है।

 

वात प्रकोप से होनेवाले उदरशूल में मुलहठी के काढ़े का सेवन सुबह और शाम को करने से वादी का उदरशूल ठीक हो जाता है।

 

मुलहठी का चूर्ण 5 ग्राम थोड़े शहद में मिलाकर चटनी जैसा बनाकर चाटने और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध चूंट-घूटकर पीने से मासिक स्राव नियमित हो जाता है। इसे कम से कम 40 दिन तक सुबह-शाम पीना चाहिए और तले पदार्थ, गरम मसाला, लाल मिर्च, बेसन के पदार्थ, अंडा व मांस का सेवन बंद रखें।

 

मुलहठी का चूर्ण 5 ग्राम और 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण थोड़े से घी में मिलाकर चाट लें और ऊपर से 1 गिलास मिश्री मिला मीठा दूध पिएं। लगातार 60 दिन तक यह प्रयोग सुबह-शाम करने से खूब बलवीर्य की वृद्धि होती है और शरीर पुष्ट व सुडौल होता है।

 

शरीर को पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली बनाने के लिए किसी भी आयुवाले स्त्री या पुरुष सुबह और रात को सोने से पहले मुलहठी का महीन पिसा हुआ चूर्ण 5 ग्राम, आधा चम्मच शुद्ध घी और डेढ़ चम्मच शहद में मिलाकर चाटें और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध चूंट-छूटकर पिएं। यह प्रयोग कम से कम 40 दिन करें। बहुत लाभकारी है।

 

5 ग्राम मुलहठी चूर्ण 2 कप पानी में डालकर इतना उबालें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें।

 

3-4 दिन तक यह प्रयोग करना चाहिए। इस प्रयोग से कफ पतला हो जाता है और ढीला हो जाता है, जिससे बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी व दमा रोगी को बड़ी राहत मिलती है।

 

मुलहठी और लाल चंदन पानी के साथ घिसकर लेप करने से जलन शांत होती है।

 

मुलहठी का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। इसके चूर्ण को थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से भी आराम होता है।


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