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pipal ke fayde | पीपल के फ़ायदे

pipal ke fayde

पीपल की छाल को घिसकर लगाने से फोड़े - फुसी , घाव और जलने से हुए घाव भी ठीक हो जाते है ।

 

सांप काटने पर अगर चिकित्सक उपलब्ध न हो तो पीपल के पत्तों का रस 2-2 चम्मच 3-4 बार पिलायें , विष का प्रभाव कम होगा ।

 

इसके फलों का चूर्ण लेने से बांझपन दूर होता है और पौरुष में वृद्धि होती है ।

 

पीलिया होने पर इसके 3-4 नए पत्तों के रस का मिश्री मिलाकर शरबत पिलायें .4-5 दिन तक दिन में दो बार दें ।

 

इसके पके फलों के चूर्ण का शहद के साथ सेवनकरने से हकलाहट दूर होती है और वाणी में सुधार होता है ।

 

इसके फलों का चूर्ण और छाल सम भाग में लेने से दमा में लाभ होता है ।

 

इसके फल और पत्तों का रस मृदु विरेचक है और बद्धकोष्ठता को दूरकरता है ।

 

यह रक्तपित्त नाशक , रक्तशोधक , सूजन मिटानेवाला , शीतल और रंग निखारनेवाला है ।

 

पीपल के पत्तों के दूध को आँख में लगाने से आँख का दर्द ठीक हो जाता है । पीपल की ताजी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी है ।

 

पीपल के ताजे पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर में आराम मिलता है । हाथ - पाँव फटने पर पीपल के पत्तों का रस या दूध लगाएं ।

 

पीपल की एक विशेषता है कि यह चर्म - विकारों जैसे - कुष्ठरोग , फोड़े - फुसी , दाद - खाज और खुजली को खत्मकरने में मददकरता है । कुष्ठ रोग में पीपल के पत्तों को कुचलकर रोगग्रस्त स्थान पर लगाया जाता है तथा पत्तों का रस तैयारकर पिलाया जाता है ।

 

यदि पीपल की पत्तियों के रस को दमा के रोगी को दिया जाए तो बहुत फायदा मिलता है ।

 

इसकी पत्तियों या छाल को कच्चा चबाने और चबाकर थूक देने से मसूड़ों से खून निकलने की समस्या में आराम मिलता है , आदिवासी मानते हैं कि इससे मुंह से दुर्गंध भी दूर होती है और यह जीभ का कट फट जाना भी ठीककर देता है ।

 

पीपल के पेड़ से निकलनेवाली गोंद को सेहत के लिए उत्तम माना जाता है , मिश्री या शक्कर के साथकरीब 1 ग्राम गोंद लेने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और यह थकान मिटाने के लिए कारगर नुस्खा माना जाता है ।

 

पीपल के सूखे फल मूत्र संबंधित रोगों के निवारण के लिए काफी कारगर माने जाते हैं । इसके सूखे फलों का चूर्ण तैयारकर प्रतिदिन एक चम्मच शक्कर या थोड़े से गुड़ के साथ मिलाकर रोगी को दें । माना जाता है कि इससे पेशाब संबंधित समस्याओं , खासकर प्रोस्ट्रेट की समस्याओं में रोगी को बेहतर महसूस होता है ।

 

मुंह में छाले हो जाने की दशा में यदि पीपल की छाल और पत्तियों के चूर्ण से कुल्ला किया जाए तो आराम मिलता है ।

 

पीपल के फल , छाल , जड़ों और नई कलियों को एकत्रकर दूध में पकाया जाता है और फिर इसमें घी , शक्कर और शहद मिलाया जाता है । यह मिश्रण नपुंसकता दूरकरता है ।

 

जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति नहीं हो रही हो , उन्हें पीपल वृक्ष पर लगे वांदा ( रसना ) पौधे को दूध में उबालकर दिया जाता है । - माना जाता है कि यह दूध गर्भाशय की गरमी को दूरकरता है जिससे महिला के गर्भवती होने की संभावना  बढ़ जाती है ।


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