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tulsi ke fayde | तुलसी के फ़ायदे

tulsi ke fayde

तुलसी की पत्तियों का रस निकालकर बराबर मात्रा में नीबू का रस मिलाएं और रात को चेहरे पर लगाएं , तो झाइयां नहीं रहती , फुसियां ठीक होती हैं और चेहरे की रंगत में निखार आता है ।

 

तुलसी के पत्तों का काढ़ा , सेंधा नमक मिलाकर पीने से फ्लू रोग ठीक हो जाता है ।

 

अत्यधिक थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है ।

 

तुलसी के नियमित सेवन से माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है । संतरे के छिलकों के पाउडर में थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर लगाने से घमौरियों में आराम मिलता है ।

 

किडनी की पथरी हो , तो तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित छह महीने सेवनकरने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है ।

 

पानी की शुद्धता के लिए तुलसी के पत्ते जलपात्र में डाल दें । तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है ।

 

तुलसी खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है । तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित रहती है ।

 

तुलसी कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करता है । हार्ट को स्वस्थ बनाने के लिए रोज खाली पेट सूखी तुलसी की पत्तियां चबाएं । इससे किसी भी तरह के हृदय संबंधी रोग दूर रहते हैं ।

 

तुलसी स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को संतुलित रखती है । इसकी पत्तियों में शक्तिशाली एटॉप्टोजन गुण होते हैं , जिन्हें एंटी - स्ट्रेस उभेंट भी कहते हैं । यह नर्क्स सिस्टम और रक्त संचरण को नियमित रखता है । साथ ही , थकान के दौरान बननेवाले फ्री रेडिकल्स को कमकरता है ।

 

जिन लोगों की नौकरी बहुत थकाऊ है , उन्हें रोज दो बार तुलसी की लगभग 10-12 पत्तियां खानी चाहिए ।

शक्तिशाली एंटी - ऑक्सीडेंट और एंटी - कार्सिनोजेनिक गुण होने के कारण तुलसी की पत्तियां ब्रेस्ट कैंसर और मुंह के कैंसर ( तंबाकू के सेवन से होनेवाला कैंसर ) को बढ़ने को रोकती हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि तुलसी के घटक ट्यूमर तक रक्त के प्रवाह को नहीं पहुंचने देते ।

 

कैंसर से बचने के लिए व इसके प्रभाव को कम करने लिए रोज तुलसी का सत्व पिएं । तुलसी में शक्तिशाली एंटी - स्ट्रेस तत्त्व होने के कारण यह स्मोकिंग छोड़ने में मददगार हो सकती है । जिस स्ट्रेस की वजह से लोग धूम्रपान के आदी हो जाते हैं , तुलसी की पत्तियां उस स्ट्रेस स्तर को कमकर देती हैं । इसे चबाने पर यह गले को कूलिंग इफेक्ट देती है ।

 

मुंह में कुछ न कुछ चबाने से सिगरेट पीने की आदत अपने छूट जाती है । इसलिए जब भी मन सिगरेट पीने का हो , तो इसके बजाय तुलसी की कुछ पत्तियां चबा लें । इससे आपकी सिगरेट पीने की आदत तो छूटेगी ही , साथ ही इसकी वजह से जो शरीर को नुकसान हुआ है , उसे भी यह कमकर देगी ।

 

तुलसी की पत्तियों में शुद्धिकरण के गुण होते हैं । यह रक्त को साफकरती है , जिससे खूबसूरत , ग्लोइंग त्वचा मिलती है और मुंहासे भी कम होते हैं । इसका एंटी - बैक्टीरियल और एंटी - फंगल गुण मुंहासे कम करने में बहुत उपयोगी होता है । यह दूसरे त्वचा इन्फेक्शन जैसे दाद - खाज को भी दूरकर देती है । इसके अलावा , सिर की खुजली भी दूरकरती है और हेयरफॉल कमकरती है ।

 

इसके लिए तुलसी पाउडर को कोकोनेट ऑयल के साथ मिक्सकरके रोज लगाएं । इससे हेयर फॉल कम होगा । तुलसी की पत्तियों को रोज सूखी , जूस या पेस्ट के रूप में त्वचा या बालों पर लगाने से फायदा होता है ।

 

तुलसी में इम्यून सिस्टम को संतुलितकरने , खांसी कम करने और सीने से उसे बाहरकरने के गुण होते हैं । इसलिए इसके सेवन से खांसी , जुकाम और सांस की बीमारियों में फायदा होता है । इसके अलावा , तुलसी में एंटी - बैक्टीरियल और एंटी - फंगल गुण भी होते हैं जो श्वसन क्रिया में किसी प्रकार के इन्फेक्शन को दूरकरते हैं ।

 

तुलसी हर तरह के सिरदर्द जैसे एलर्जी , ठंड या माइग्रेन से होनेवाले दर्द में आराम देती है । तुलसी में दर्द और सर्दी - खांसी से राहत दिलाने जैसे कई गुण होते हैं । अगर सिरदर्द से परेशान हैं तो कसी हुई तुलसी की पत्तियों या तुलसी के सत्व को पानी में डालकर उबालें। अब इसे थोड़ा गुनगुना होने दें। इसके बाद इस पानी में तौलिए को ठुकर निचोड़ें और सिर पर लगाएं। इससे राहत मिलेगी।

 

तुलसी की पत्तियां किडनी के लिए काफी अच्छी होती हैं। तुलसो रक्त से यूरिक एसिद्ध स्तर को कमकरती हैं, जो किडनी में पथरी बनने का मुख्य कारण होता है। इसके साथ ही किडनी को साफ भी करती है। तुलसी में मौजूद एसेटिक एसिड और दूसरे तरच किडनी की पथरी को गलाने का कामकरते हैं। साथ ही इसका पेनकिलर प्रभाव पथरी के दर्द को दूरकरता है। किडनी की पथरी को निकालने के लिए तुलसी की पत्तियों के जूस को शहद के साथ मिलाकर 6 महीने तक रोज पिएं।

 

तुलसी में कीटाणुनाशक और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। एंटी-वायोटिक बुखार कम करने के लिए की जरूरी होता है। कल इन्फेक्शन की वजह से होनेवाली बीमारियों और मलेरिया से भी राहत देती है।

 

बुखार में तुलसी का काढ़ा बहुत फायदाकरता है। इसे बनाने के लिए तुलसी की पत्तियों को आधे लीटर पानी में इलायची पाउडर के साथ मिलाकर तब तक गर्म करें, जब तक यह मिक्सचर आधा न रह जाए। तुलसी की पत्तियों और इलायची पाउडर का अनुपात (13) होना चाहिए।

 

इस काढ़े को चीनी और दूध के साथ मिलाकर प्रत्येक दो से तीन घंटे में जरूर पिएं। यह उपचार बच्चों को

बुखार से जल्दी आरम पहुंचाता है।

 

तुलसी के पसे इंसुलिन की संसविटी को बढ़ाते हैं। यह रक्त से शुगर स्तर भी कमकरते हैं और डाइबिटीज का टीक तरह से इलाजकरते हैं।


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